नया फोन या ईयरबड्स खरीदते समय हम अक्सर कीमत और ऑफर देखकर खुश हो जाते हैं, लेकिन दिल्ली में हुई एक बड़ी कार्रवाई ने फिर याद दिला दिया है कि बाज़ार में हर “ब्रांडेड” दिखने वाली चीज़ असली नहीं होती। अगर कोई OnePlus, OPPO या Realme का सामान बहुत सस्ते में दे रहा है, तो डील अच्छी लग सकती है, लेकिन उसके पीछे नकली प्रोडक्ट का खेल भी हो सकता है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रविवार को तीन जगहों पर छापेमारी की, जिसमें दो गोदाम और एक फैक्ट्री शामिल थे। आरोप है कि यहां लोकल मोबाइल एक्सेसरीज़ को OPPO, OnePlus और Realme जैसे ब्रांड्स के नाम से पैक करके बाजार में बेचा जा रहा था।
पुलिस ने करोल बाग के रेघरपुरा में दो गोदामों और मोती नगर की एक फैक्ट्री पर रेड की। इस दौरान बड़ी मात्रा में नकली प्रोडक्ट्स बरामद किए गए, जिन पर OPPO, OnePlus और Realme की ब्रांडिंग और स्टिकर्स लगे थे।
छापेमारी में पुलिस को आठ मशीनें भी मिलीं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर नकली लेबल, बॉक्स और पैकेजिंग तैयार करने के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा हज़ारों नकली आइटम्स भी जब्त किए गए, जिनमें ईयरबड्स, ईयरफोन, अडैप्टर, पैकेजिंग बॉक्स और डाई शीट्स शामिल थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी चीन से बिना ब्रांड वाली मोबाइल एक्सेसरीज़ थोक में मंगाते थे और फिर उन्हें नकली ब्रांडेड बॉक्स में पैक करके रिटेल बाज़ारों में सप्लाई करते थे। इन्हें असली ब्रांडेड या ड्यूटी-फ्री प्रोडक्ट बताकर बेचा जाता था।
इस कार्रवाई में OPPO, OnePlus और Realme के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जिन्होंने जब्त किए गए सामान को नकली बताया। पुलिस ने भारत राम और गौतम कुमार नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि खाटू श्याम प्रिंटर्स के अमित मिश्रा की तलाश जारी है।
नकली फोन या एक्सेसरी कैसे पहचानें?
ऐसी घटनाएं बताती हैं कि फोन या एक्सेसरी खरीदते समय सिर्फ डिस्काउंट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सबसे पहले कीमत को ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट से मिलाएं, क्योंकि नकली सामान अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा सस्ता बेचा जाता है।
हमेशा अधिकृत रिटेलर, ऑफिशियल ब्रांड स्टोर या भरोसेमंद ऑनलाइन सेलर से ही खरीदारी करें। पैकेजिंग भी ध्यान से देखें – असली प्रोडक्ट में लोगो, प्रिंटिंग, सील और बॉक्स की क्वॉलिटी साफ होती है, जबकि नकली सामान में स्पेलिंग गलती, फीका रंग या खराब फिनिशिंग दिख सकती है।
स्मार्टफोन या एक्सेसरी खरीदने के बाद IMEI नंबर, सीरियल नंबर या QR कोड को ब्रांड की वेबसाइट या ऐप पर ज़रूर चेक करें। थोड़ा सावधान रहकर आप बड़ी धोखाधड़ी से बच सकते हैं।

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