अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं और कीमतें देखकर बार-बार रुक जा रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों में भारत में कई फोन चुपचाप महंगे हुए हैं। Samsung, Vivo, Oppo, Realme, Xiaomi, Nothing, OnePlus और Motorola जैसे ब्रांड्स ने अलग-अलग मॉडलों की कीमतें बढ़ाई हैं। कई फोन्स पर ₹1,000 से ₹6,000 तक की बढ़ोतरी दिखी है।
इस महंगाई के पीछे सिर्फ रुपये की कमजोरी या सामान्य लागत नहीं है। बड़ा कारण RAM और मेमोरी चिप्स की कमी है। ChatGPT, Claude और Gemini जैसे AI टूल्स को चलाने के लिए दुनिया भर में बड़े डाटा सेंटर बन रहे हैं। इन्हें भारी मात्रा में मेमोरी चिप्स चाहिए, और यही चिप्स स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और गेमिंग कंसोल में भी इस्तेमाल होती हैं।

AI डाटा सेंटर कैसे बढ़ा रहे हैं कीमत?
मेमोरी बनाने वाली बड़ी कंपनियां Samsung, SK Hynix और Micron अब AI डाटा सेंटरों को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं, क्योंकि वहां मांग भी ज्यादा है और मुनाफा भी बेहतर है। High Bandwidth Memory यानी HBM की मांग तेजी से बढ़ी है, जो AI सर्वरों में इस्तेमाल होती है। इसका सीधा असर आम स्मार्टफोन में लगने वाली RAM और स्टोरेज की उपलब्धता पर पड़ रहा है।
IDC के मुताबिक, 2026 में बनने वाली मेमोरी चिप्स का बड़ा हिस्सा डाटा सेंटरों में जा सकता है। इसी वजह से स्मार्टफोन कंपनियों के लिए RAM और स्टोरेज महंगे होते जा रहे हैं।
मांग भी गिर रही है
कीमतें बढ़ने का असर बिक्री पर भी दिख रहा है। भारत में 2026 की शुरुआत में स्मार्टफोन बिक्री करीब 9 प्रतिशत कम बताई गई है। ग्लोबल स्तर पर भी स्मार्टफोन शिपमेंट में 4 से 6 प्रतिशत तक गिरावट की रिपोर्ट आई है। इसका मतलब साफ है—लोग नए फोन खरीदने से पहले अब ज्यादा सोच रहे हैं।
सबसे ज्यादा दबाव ₹15,000 से ₹30,000 वाले सेगमेंट पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में खरीदार इसी रेंज में फोन देखते हैं। Techarc के Faisal Kawoosa के मुताबिक, आने वाले समय में ₹15,000 से कम में 5G फोन मिलना मुश्किल हो सकता है, और यही असर ₹20,000 से कम वाले सेगमेंट तक पहुंच सकता है।
Xiaomi जैसे ब्रांड्स पर भी दबाव दिखा है, क्योंकि उनका बड़ा हिस्सा किफायती और एंट्री-लेवल बाजार से आता है। वहीं Apple जैसी कंपनियां थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं, क्योंकि उनका प्रीमियम सेगमेंट मजबूत है और सप्लाई चेन पर उनकी पकड़ भी बेहतर है।

खरीदारों के लिए क्या मतलब है?
अगर कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं, तो बाजार धीरे-धीरे महंगे फोन की तरफ खिसक सकता है। यानी कंपनियां कम कीमत वाले मॉडल कम और ज्यादा मार्जिन वाले प्रीमियम फोन ज्यादा बेचने पर ध्यान दे सकती हैं।
इसका दूसरा असर सेकेंड-हैंड 5G फोन बाजार पर दिख सकता है। नए फोन महंगे होने पर कई लोग पुराना 5G फोन खरीदना या अपने मौजूदा फोन की मरम्मत कराना पसंद कर सकते हैं।
फिलहाल राहत जल्दी मिलती नहीं दिख रही। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेमोरी की कमी 2027 के अंत तक बनी रह सकती है। ऐसे में अगर आपको नया फोन या लैपटॉप लेना है, तो सेल, बैंक छूट और एक्सचेंज ऑफर का इंतजार करना ज्यादा समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

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