iPhone 18 सीरीज़ अभी लॉन्च से कई महीने दूर है, लेकिन इसके बारे में चर्चा अभी से तेज़ हो चुकी है। वजह सिर्फ नए फीचर्स नहीं, बल्कि वो संतुलन है जिसे Apple हर बार साधने की कोशिश करता है, यानि नई टेक्नोलॉजी देना, लेकिन कीमत को बहुत ज़्यादा डरावना न बनने देना। हालिया रिपोर्ट्स में iPhone 18 Pro के कैमरा अपग्रेड और कीमत को लेकर जो संकेत मिल रहे हैं, वो इसी कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
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iPhone 18 Pro में कैमरा कैसे बदल सकता है?
सप्लाई-चेन रिपोर्ट्स और Weibo पर सामने आई जानकारी के अनुसार, Apple variable aperture camera system को टेस्ट कर रहा है। आसान शब्दों में कहें तो कैमरा लेंस अब खुद को अलग-अलग रोशनी की स्थिति के हिसाब से एडजस्ट कर पाएगा। इससे लो-लाइट और डे-लाइट फोटोग्राफी दोनों में बेहतर रिज़ल्ट मिलने की उम्मीद की जा रही है।

यह आइडिया नया नहीं है। Xiaomi ने पहले ही अपने Ultra सीरीज़ फोन्स में dual और stepless aperture जैसी टेक्नोलॉजी दी है। फर्क बस इतना है कि अगर Apple इसे अपनाता है, तो उसका ज़ोर हार्डवेयर से ज़्यादा सॉफ्टवेयर और सिस्टम इंटीग्रेशन पर होगा, यानि यूज़र को बिना ज़्यादा सेटिंग्स छुए बेहतर फोटो मिलें।
इसके साथ ही, Apple के अंदर teleconverter-style optical zoom को लेकर भी टेस्टिंग की बात सामने आई है। Android ब्रांड्स जैसे OPPO और vivo पहले ही ऐसे एक्सेसरीज़ दिखा चुके हैं, जो टेलीफोटो कैमरा की रेंज को 200mm से ऊपर तक ले जाते हैं। अगर Apple इस दिशा में जाता है, तो यह मोबाइल फोटोग्राफी को और प्रो-लेवल बना सकता है, लेकिन यह सब तभी मायने रखेगा, जब इसे रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आसान रखा जाए।
टेक्नोलॉजी बढ़ेगी, लेकिन कीमत?

यहीं से कहानी का दूसरा और ज़्यादा दिलचस्प हिस्सा या कहें कि सवाल आता है कि कीमतें क्या होंगी। जाने-माने Apple एनालिस्ट Ming-Chi Kuo के अनुसार, iPhone 18 सीरीज़ के लिए Apple कीमत को ज़्यादा बढ़ाने से बचना चाहता है। यहां तक कि कंपनी की कोशिश शुरुआती कीमत को मौजूदा लेवल के आसपास ही रखने की बताई जा रही है।
यह बात इसलिए अहम है क्योंकि iPhone 18 में इस्तेमाल होने वाला A20 चिप Apple के लिए अब तक का सबसे महंगा प्रोसेसर हो सकता है। TSMC की एडवांस्ड चिप फैब्रिकेशन पर AI और GPU वर्कलोड की भारी डिमांड है, जिससे कॉस्ट बढ़ रही है। इसके अलावा, मेमोरी की कीमतों में भी 2026 तक 10–25% तक बढ़ोतरी की बात कही जा रही है।
इन हालात में आम तौर पर कंपनियां कीमत बढ़ा देती हैं। लेकिन Kuo का मानना है कि Apple इस बार अलग रास्ता चुन सकता है। कंपनी खुद मार्जिन झेलकर कीमत को कंट्रोल में रखने की कोशिश कर रही है। इसका फायदा यह होगा कि बढ़ती कीमतों के दौर में Apple खुद को ज़्यादा भरोसेमंद ब्रांड के तौर पर पेश कर सकेगा।
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Apple की असली रणनीति क्या हो सकती है?
संभावना है कि Apple बेस मॉडल की कीमत स्थिर रखे, लेकिन ज़्यादा स्टोरेज वाले वेरिएंट्स को महंगा करे। यह रणनीति पहले भी देखी जा चुकी है। कीमत को प्राथमिकता देने वाले यूज़र ज़्यादातर बेस मॉडल ही खरीदते हैं, जबकि हाई स्टोरेज लेने वाले प्रीमियम देने को तैयार रहते हैं।
इसके अलावा, Apple को हार्डवेयर से कमाए गए हर डॉलर पर पूरी तरह निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है। Services और subscriptions कंपनी के लिए लंबे समय से बड़ा रेवेन्यू सोर्स रहे हैं। ऐसे में iPhone 18 पर थोड़ा कम मुनाफा, भविष्य में ज्यादा यूज़र्स और ज्यादा सर्विस रेवेन्यू में बदल सकता है।
तो iPhone 18 से क्या उम्मीद करें?
अब तक जो संकेत मिलते हैं, उनसे लगता है कि iPhone 18 Pro एक तरफ कैमरा टेक्नोलॉजी में बड़ा कदम हो सकता है, और दूसरी तरफ कीमत के मामले में अपेक्षाकृत शांत।
हालांकि, सितंबर लॉन्च तक बहुत कुछ बदल सकता है। सप्लाई-चेन, ग्लोबल डिमांड और करेंसी फैक्टर्स आख़िरी फैसला तय करेंगे। लेकिन फिलहाल जो तस्वीर बन रही है, वो iPhone फैंस के लिए थोड़ी राहत देने वाली है।

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