कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने WhatsApp पर फ़ाइल भेजी और आप उसे फोन में जैसे चाहें वैसे सेव या शेयर ही नहीं कर पाए? या फिर आपने सोचा हो कि “मैं Chrome नहीं, कोई और ब्राउज़र इस्तेमाल करना चाहता हूँ” लेकिन सेटिंग्स में जाकर भी बात आधी-अधूरी सी लगी?
यहीं से Android और iPhone के बीच का फर्क सामने आता है। स्पेसिफिकेशन की लड़ाई से अलग, कुछ छोटे लेकिन रोज़ के काम ऐसे हैं जहाँ Android आज भी ज़्यादा आसान और खुला हुआ लगता है।
फाइल डाउनलोड और मैनेजमेंट – Android में सीधा, iPhone में घुमावदार
Android में कोई फोटो, PDF या वीडियो डाउनलोड करने के बाद आप उसे सीधे Files ऐप या किसी भी फ़ोल्डर में देख सकते हैं।
- नाम बदलना आसान
- किसी और ऐप में शेयर करना आसान
- कंप्यूटर में ट्रांसफर करना आसान
iPhone में वही काम अक्सर Files ऐप → सही लोकेशन ढूँढना → Share sheet → सीमित ऑप्शन जैसे कई स्टेप्स माँगता है।
यह कोई “बग” नहीं है, बल्कि Apple का डिज़ाइन का फैसला है। लेकिन जो यूज़र फोन को सिर्फ सोशल मीडिया नहीं, काम के लिए भी इस्तेमाल करता है, उसे Android ज़्यादा आसान लगता है।

Default apps बदलना – Android में कंट्रोल, iPhone में सीमाएँ
Android पर आप तय कर सकते हैं कि:
- लिंक किस ब्राउज़र में खुले
- मैप लिंक Google Maps में जाए या किसी और में
- फ़ाइल किस ऐप से खुले
सब कुछ एक बार सेट करो और भूल जाओ।
iPhone में Apple ने हाल के सालों में डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र और mail app बदलने की इजाज़त दी है, लेकिन अनुभव अब भी उतना स्मूद नहीं है। कई बार लिंक फिर भी Safari में खुल जाते हैं, या किसी third-party ऐप को पूरी तरह डिफ़ॉल्ट बनाना संभव नहीं होता।
यानी विकल्प है, लेकिन आज़ादी पूरी नहीं।
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App permissions और background control – Android ज़्यादा पारदर्शी है
Android आपको साफ-साफ दिखाता है कि कौन-सा ऐप बैकग्राउंड में बैटरी खा रहा है, कौन-सा ऐप लोकेशन , कैमरा या माइक बार-बार इस्तेमाल कर रहा है और आप उसे पूरी तरह रोक भी सकते हैं
iPhone में privacy indicators ज़रूर हैं, लेकिन बैकग्राउंड कंट्रोल ज़्यादातर iOS खुद तय करता है, यूज़र नहीं।
Apple का तरीका है कि “हम बेहतर जानते हैं”, Android का तरीका है कि “आप चुनें करें”। यहीं पर पप्रेफरेंस का फर्क पैदा होता है।
क्या इसका मतलब Android बेहतर है?
नहीं। iPhone आज भी कैमरा कंसिस्टेंसी, लम्बे समय के लिए पबेहत्तर परफॉरमेंस और एक स्थिर ईको-सिस्टम ऑफर करते हैं।
लेकिन अगर आप फाइलों के साथ काम करते हैं, फोन को पर्सनल कंप्यूटर की तरह इस्तेमाल करते हैं और फोन की हर चीज़ पर थोड़ा ज़्यादा नियंत्रण चाहते हैं, तो Android आज भी कम झंझट वाला लगता है।
निष्कर्ष
Android और iPhone दोनों अच्छे, लेकिन अलग प्लेटफॉर्म हैं। Android आज भी उस यूज़र के लिए बना लगता है, जो फोन से सवाल पूछता है कि “मैं इससे और क्या कर सकता हूँ?”। वहीँ iPhone उस यूज़र के लिए है “जो बिना छेड़छाड़ सब कुछ स्मूद और लम्बे समय के लिए चाहता है।”
यही फर्क है, और यही वजह है कि कुछ काम Android में आज भी आसान लगते हैं।

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