पिछले कुछ दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में जिस तरह की तेज़ उछाल देखने को मिली है, उसने निवेशकों से लेकर आम खरीदारों तक सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। घरेलू बाजार में सोना ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकल चुका है, जबकि चांदी ₹4 लाख प्रति किलो का आंकड़ा पार कर चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या यह तेजी अब थमने वाली है, या दाम यहां से नीचे भी आ सकते हैं?
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ग्लोबल अनिश्चितता ने फिर से सेफ-हेवन को चमका दिया
मेरी राय में मौजूदा रैली की सबसे बड़ी वजह वैश्विक अनिश्चितता है। दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, ट्रेड वॉर की आशंका और आर्थिक सुस्ती का डर निवेशकों को जोखिम से दूर रहने पर मजबूर कर रहा है।
MarketWatch और Barron’s की हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि जैसे-जैसे इक्विटी और करेंसी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं — और यही ट्रेंड अभी साफ़ दिख रहा है।
डॉलर और ब्याज दरों को लेकर तस्वीर अब भी धुंधली
अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर असमंजस भी इस तेजी को हवा दे रहा है। फेडरल रिज़र्व की तरफ से दरों में कटौती को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से बाजार में बेचैनी बनी हुई है।
MarketWatch के मुताबिक, जब ब्याज दरों और डॉलर की दिशा साफ़ नहीं होती, तब सोना पारंपरिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करता है। कमजोर डॉलर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

सेंट्रल बैंक और निवेश फंड्स की मजबूत मौजूदगी
World Gold Council (WGC) के डेटा के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सेंट्रल बैंकों और निवेश फंड्स की तरफ से सोने की खरीद लगातार मजबूत बनी हुई है। भले ही कुछ समय के लिए खरीद की रफ्तार धीमी हो, लेकिन ETF और लॉन्ग-टर्म निवेशकों की मांग ने कीमतों को नीचे गिरने नहीं दिया। यही वजह है कि हर छोटी गिरावट पर सोने में फिर से खरीदारी देखने को मिलती है।
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4️⃣ चांदी: जहां तेजी के साथ रिस्क भी बढ़ा है
चांदी की कहानी सोने से थोड़ी अलग है। इसमें निवेश के साथ-साथ इंडस्ट्री की मांग भी बड़ा फैक्टर है, खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में।
लेकिन यहां जोखिम भी ज्यादा है। Business Insider की एक रिपोर्ट में JPMorgan के पूर्व चीफ स्ट्रैटेजिस्ट मार्को कोलानोविक के हवाले से कहा गया है कि चांदी की मौजूदा रैली काफी हद तक सट्टेबाज़ी से जुड़ी हो सकती है और इसमें आगे चलकर तेज़ करेक्शन देखने को मिल सकता है।
तो क्या अब गिरावट आएगी?
एकमत राय फिलहाल नहीं है — और यही इस बाजार की सच्चाई है।
- चांदी में मौजूदा स्तरों से तेज़ उतार-चढ़ाव का जोखिम बना हुआ है।
- वहीं दूसरी ओर, World Gold Council और Barron’s जैसे प्लेटफॉर्म्स का मानना है कि सोने की कीमतों को 2026 तक भी मैक्रो अनिश्चितता और निवेश मांग का सपोर्ट मिल सकता है, भले ही तेजी की रफ्तार धीमी पड़ जाए।
- कई ग्लोबल एनालिस्ट्स यह भी मानते हैं कि शॉर्ट टर्म में कंसोलिडेशन या हल्की गिरावट आ सकती है, लेकिन बड़ी गिरावट तभी संभव है जब ब्याज दरों और ग्लोबल माहौल को लेकर तस्वीर साफ़ हो।
मेरी राय
मेरे हिसाब से:
- सोने में बड़ी गिरावट फिलहाल मुश्किल दिखती है, क्योंकि नीचे की तरफ मजबूत डिमांड मौजूद है।
- चांदी ज्यादा वोलैटाइल रहेगी, और इसमें करेक्शन का खतरा सोने से ज्यादा है।
आम निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति यही होगी कि:
- एक साथ भारी निवेश से बचें
- धीरे-धीरे खरीदारी करें
- और सोना-चांदी को लॉन्ग-टर्म हेज की तरह देखें, न कि त्वरित मुनाफे के साधन की तरह
इस वक्त सोना और चांदी सिर्फ महंगे नहीं हुए हैं, वे दुनिया की बेचैनी और अनिश्चितता की कहानी भी कह रहे हैं।

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