नया फोन खरीदते वक्त एक अजीब सा जोश होता है। ऑफर दिखता है, रिव्यू वीडियो चलते हैं, दोस्त सलाह देते हैं और दिमाग कहता है, “अब नहीं लिया तो पछताऊँगा।”
लेकिन सच्चाई ये है कि ज़्यादातर लोग फोन खरीदने के बाद पछताते हैं, खरीदते वक्त नहीं। इसका कारण फोन खराब होना नहीं होता, कारण वो सवाल होते हैं, जो हमने खुद से पूछे ही नहीं।
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सवाल नंबर 1: मैं इस फोन से रोज़ क्या करने वाला हूँ?
ये सबसे बुनियादी सवाल है, और सबसे ज़्यादा हम इसे दरकिनार यानि ignore करते हैं। ज़्यादातर लोग फोन ऐसे खरीदते हैं जैसे:
- गेमिंग फोन चाहिए क्योंकि “powerful है”
- कैमरा फोन चाहिए क्योंकि “50MP है”
- फ्लैगशिप चाहिए क्योंकि “भविष्य में अच्छा चलेगा”
लेकिन सच ये है कि आप अगर दिन में 2 घंटे WhatsApp, Instagram और YouTube ही चलाते हैं, और गेम कभी-कभार खेलते हैं और कैमरा बस यादों के लिए चाहिए, तो भारी प्रोसेसर और ज़्यादा चमकने वाले स्पेसिफिकेशन आपके किसी काम के नहीं।
नतीजा?
फोन तेज़ है, लेकिन आपको भारी लगता है।
बैटरी बड़ी है, लेकिन दिन भर नहीं चलती।
और 6 महीने में उत्साह खत्म।

सवाल नंबर 2: क्या मैं फीचर खरीद रहा हूँ या FOMO?
“बस 3 हज़ार और डाल दो…”
“इसमें नया चिप है…”
“अगले साल भी स्मूद चलेगा…”
यहीं से FOMO शुरू होता है।
आप सोचते हैं कि थोड़ा महंगा ले लेता हूँ, सुरक्षित रहेगा। लेकिन असलियत ये है कि ज़्यादातर लोग फोन 2–3 साल में बदल देते हैं या फ्लैगशिप की ताकत का 60% भी इस्तेमाल नहीं होता या EMI का बोझ रोज़ याद दिलाता है कि फोन ‘ज़रूरत’ नहीं, ‘खर्च’ बन चुका है।
फोन future-proof नहीं होता, आपका इस्तेमाल तय करता है कि वो आपके लिए सही है या नहीं।
सवाल नंबर 3: 1 साल बाद ये फोन मुझे कैसा लगेगा?
ये सवाल बहुत कम लोग पूछते हैं।
खरीदते वक्त सब अच्छा लगता है: कैमरा बढ़िया, डिस्प्ले चमकदार, और नया डिज़ाइन।
लेकिन 1 साल बाद?
- क्या बैटरी वैसी रहेगी?
- क्या अपडेट मिलते रहेंगे?
- क्या फोन स्लो तो नहीं लगेगा?
यहीं पर ब्रैंड का भरोसा, सॉफ्टवेयर अपडेट, और बैटरी हेल्थ जैसे बोरिंग लगने वाले टॉपिक असल मायने रखते हैं।
अक्सर लोग फोन खरीदते वक्त ये सब ध्यान में नहीं रखते और और बाद में कहते हैं: “पहले वाला फोन ही ठीक था।”
तो क्या हर महंगा फोन गलत है?
नहीं। लेकिन हर खरीदा गया महंगा फोन सही भी नहीं होता।
अच्छा फोन वही है:
- जो आपके रोज़ के इस्तेमाल से मैच करे
- जो 1 साल बाद भी चुभे नहीं
- और जो आपको बार-बार ये याद न दिलाए कि आपने जल्दबाज़ी में फैसला लिया था
निष्कर्ष: फोन बदलना आसान है, फैसला नहीं
नया फोन लेना गलत नहीं है। गलत है बिना खुद से सवाल पूछे फोन खरीदना लेना।
अगर अगली बार खरीदने से पहले, आपने ये 3 सवाल खुद से पूछ लिए तो हो सकता है आपका फोन थोड़ा कम flashy हो, लेकिन लंबे समय तक सही लगे और यही स्मार्ट खरीद होती है।

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