गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के पास समय भी ज़्यादा होता है और स्क्रीन देखने की जिद भी। ऐसे में अगर उन्हें सिर्फ साधारण कार्टून या शार्ट वीडियो दिखाने के बजाय ऐसी फिल्में दिखाई जाएं, जिनमें कहानी भी अच्छी हो और सीख भी मिले, तो छुट्टियां ज़्यादा बेहतर बन सकती हैं। अच्छी बात यह है कि हिंदी सिनेमा में बच्चों और विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि मेहनत, दोस्ती, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सपनों की अहमियत भी समझाती हैं।
इन फिल्मों को बच्चों के साथ बैठकर देखना इसलिए भी अच्छा है, क्योंकि इनके बाद आप उनसे बात कर सकते हैं कि उन्हें कौन सा किरदार अच्छा लगा, किस सीन ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया, या वे उस परिस्थिति में क्या करते। यही बातचीत किसी भी फिल्म को सिर्फ मनोरंजन से आगे ले जाकर एक सीख लेने का अनुभव बना देती है। ऐसी ही कुछ बेहतरीन फिल्मों की सूची हम नीचे दे रहे हैं, जो Summer holidays में परिवार के साथ बिताने के लिए भी ये फिल्में अच्छी शुरुआत हो सकती हैं।
Taare Zameen Par (तारे जमीन पर)

बच्चों के लिए सीख देने वाली फिल्मों की बात हो और तारे जमीन पर का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। यह फिल्म आठ साल के ईशान की कहानी है, जो पढ़ाई में कमज़ोर समझा जाता है, लेकिन असल में dyslexia से जूझ रहा होता है। फिल्म माता-पिता और शिक्षक दोनों को यह समझाती है कि हर बच्चा एक जैसा नहीं होता। कुछ बच्चे अंकों और शब्दों में कमज़ोर हो सकते हैं, लेकिन कल्पना और क्रिएटिविटी में बहुत आगे होते हैं। बच्चों के साथ यह फिल्म देखना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि यह उन्हें खुद को कमतर न समझने की सीख देती है।
Chillar Party (चिल्लर पार्टी)

चिल्लर पार्टी बच्चों की मासूमियत, दोस्ती और साहस की कहानी है। यह फिल्म दिखाती है कि जब बच्चे किसी सही बात के लिए खड़े होते हैं, तो वे बड़ों को भी सोचने पर मजबूर कर सकते हैं। फिल्म में कॉलोनी के बच्चों की दोस्ती एक गरीब बच्चे और उसके कुत्ते से होती है, और फिर वे उसे बचाने के लिए पूरे सिस्टम से भिड़ जाते हैं। यह फिल्म बच्चों को सहानुभूति, समानता और मिलकर काम करने जैसी बातें बहुत सरल तरीके से समझाती है।
Stanley ka Dabba (स्टेनली का डब्बा)

स्टेनली का डब्बा स्कूल, टिफिन और बच्चों की दुनिया के बहाने बहुत गहरी बात कहती है। फिल्म में स्टेनली नाम का बच्चा है, जो अपनी परिस्थिति के बावजूद खुश रहने की कोशिश करता है। दूसरी तरफ एक शिक्षक का व्यवहार बच्चों को यह दिखाता है कि बड़ों की कथनी और करनी में फर्क बच्चों से छिपता नहीं है। यह फिल्म बच्चों को चीज़ें बाँटना, दया का भाव और दूसरों की परिस्थिति समझने की सीख देती है। माता पिता के लिए भी यह फिल्म एक रिमाइंडर कॉल है कि बच्चे छोटी-छोटी बातों को बहुत गहराई से महसूस करते हैं।
I am Kalam (आई एम कलाम)

आई एम कलाम छोटू नाम के एक गरीब बच्चे की कहानी है, जो मुश्किल हालातों में भी बड़े सपने देखना नहीं छोड़ता। वह डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरित होकर खुद को “कलाम” कहने लगता है और जिंदगी में कुछ बनने का सपना देखता है। यह फिल्म बच्चों को बताती है कि गरीबी या परिस्थिति किसी के सपनों को रोक नहीं सकती। अगर बच्चा मेहनती है और सीखने की इच्छा रखता है, तो वह अपने लिए रास्ता बना सकता है।
Dhanak (धनक)

धनक भाई-बहन के रिश्ते पर बनी बेहद प्यारी फिल्म है। इसमें परी अपने दृष्टिहीन भाई छोटू से वादा करती है कि उसके नौवें जन्मदिन से पहले वह उसे देखने में मदद करेगी। इसी उम्मीद के साथ दोनों एक सफर पर निकलते हैं। फिल्म बच्चों को उम्मीद, प्रेम और ज़िम्मेदारी की सीख देती है। यह खासतौर पर उन बच्चों के लिए अच्छी है, जिन्हें भावुक करने वाली और रोमांचक कहानियां पसंद आती हैं।
Dangal (दंगल)

दंगल सिर्फ खेल पर आधारित नहीं है, बल्कि यह बच्चों, खासकर लड़कियों को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देती है। महावीर सिंह फोगाट अपनी बेटियों को पहलवानी के लिए तैयार करते हैं, जबकि समाज लगातार सवाल उठाता है। यह फिल्म बच्चों को अनुशासन, मेहनत और gender stereotypes से लड़ने की सीख देती है। अगर आप चाहते हैं कि बच्चे यह समझें कि “लड़कियां यह नहीं कर सकतीं” जैसी सोच कितनी गलत है, तो यह फिल्म अच्छा विकल्प है।
Hichki (हिचकी)

हिचकी एक शिक्षक और कमज़ोर माने जाने वाले विद्यार्थियों की कहानी है। रानी मुखर्जी का किरदार Tourette syndrome से जूझता है, लेकिन वह अपनी कमज़ोरी को अपनी पहचान बनने नहीं देती। फिल्म दिखाती है कि सही शिक्षक बच्चों की जिंदगी बदल सकता है। यह बच्चों को आत्मविश्वास, अपने आप या किसी दूसरे को को स्वीकार करने और मेहनत की सीख देती है। साथ ही यह भी बताती है कि किसी की कमी का मज़ाक बनाने के बजाय उसे समझना ज़रूरी है।
Nil Battey Sannata (निल बटे सन्नाटा)

निल बटे सन्नाटा मां-बेटी की कहानी है, लेकिन यह बच्चों के लिए बहुत ज़रूरी फिल्म है। इसमें मां चाहती है कि बेटी पढ़-लिखकर बेहतर ज़िन्दगी बनाए, जबकि बेटी अपने सपनों को बहुत छोटा मान चुकी होती है। फिल्म बच्चों को समझाती है कि सपने देखना और उन्हें बचाए रखना कितना ज़रूरी है। माता पिता के लिए भी यह फिल्म खास है, क्योंकि यह बताती है कि बच्चे को मोटीवेट करने के लिए सिर्फ डांटना काफी नहीं होता, कभी-कभी उसके साथ चलना पड़ता है।
Hawaa Hawaai (हवा हवाई)

हवा हवाई एक ऐसे बच्चे की कहानी है, जो मुश्किल हालातों के बावजूद स्केटिंग चैंपियन (skating champion) बनने का सपना देखता है। फिल्म मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन की अहमियत दिखाती है। यह बच्चों को सिखाती है कि हुनर तभी आगे बढ़ता है, जब उसे मेहनत और सपोर्ट मिले। अगर आपके बच्चे स्पोर्ट्स या किसी एक स्किल में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह फिल्म उनका मनोबल बढ़ा सकती है।
Ferrari Ki Sawaari (फरारी की सवारी)

फरारी की सवारी पिता और बेटे के सपनों की कहानी है। बेटा बड़ा क्रिकेटर बनना चाहता है और पिता उसकी मदद के लिए हर संभव कोशिश करता है। फिल्म बच्चों को सपनों की कीमत समझाती है, लेकिन साथ ही ईमानदारी की अहमियत भी दिखाती है। यह परिवार के साथ देखने के लिए अच्छी फिल्म है, क्योंकि इसमें माता-पिता के संघर्ष और बच्चों की महत्वाकांक्षा दोनों साफ नज़र आते हैं।
गर्मी की छुट्टियों (Summer vacations) में ये फिल्में बच्चों के लिए सिर्फ टाइम पास नहीं, बल्कि अच्छी सीख का ज़रिया बन सकती हैं। बस एक बात ध्यान रखें कि किसी भी फिल्म को दिखाने से पहले जांच लें कि वो बच्चे की उम्र के अनुसार हो और बच्चा उसे आपके मार्गदर्शन में देखे।

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